तीन वर्ष से 176 स्कूल बंद, नहीं मिले अध्यापक

तीन वर्ष से 176 स्कूल बंद, नहीं मिले अध्यापक

बड़ेल में आज होगी गैर जिले से आए शिक्षकों की काउंसिलिंग,तत्काल आवंटित हो जाएगा विद्यालय, पारदर्शी रहेगी सूची

संवादसूत्र, बाराबंकी : जिले में बीते तीन वर्ष से 176 परिषदीय विद्यालय बंद चल रहे थे, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग में कागजों पर संचालित रहे। बंद स्कूलों के बारे में प्रशासन भी नहीं जानता था। यह खुलासा नवागत बेसिक शिक्षा अधिकारी ने किया है।

अब इन स्कूलों की सूची तैयार हो गई है, यहां अध्यापकों की काउंसिलिंग के दौरान ही आवंटन कर स्कूलों को भेज दिया जाएगा। तीन हजार 31 प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 176 विद्यालय अभी तक बंद चल रहे थे। जिससे जिला प्रशासन पूरी तरह से अनजान था। यह इसलिए था कि पूर्व में हुई भर्तियों में आए शिक्षकों की तैनाती मनचाहे स्कूलों में कर दी गई। यही कारण है कि बंकी के सभी विद्यालयों में मानक विहीन शिक्षक तैनात हैं। जिससे 176 विद्यालय चपरासी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और निजी शिक्षकों के सहारे चलने लगे, वैसे इन विद्यालयों को बंद ही माना जा रहा था।

इधर हाल ही में गैर जिलों से 181 शिक्षक तबादला होकर आए हैं। अब इन शिक्षकों को स्कूल आवंटित करना है। जिसके लिए सोमवार को बड़ेल स्थित संसाधन केंद्र में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में काउंसिलिंग रखी गई है। बंद 176 स्कूलों में ही तैनात किया जाएगा। शेष शिक्षकों को एकल शिक्षक वाले स्कूल में भेजा जाएगा। जिसकी सूची तैयार कर ली गई है।

तत्काल विद्यालय आवंटित : सोमवार को होने वाली काउंसिलिंग में प्रमाण पत्र दिखाने के बाद बीएसए ऑफिस से बनी बंद स्कूलों की सूची शिक्षकों को दी जाएगी। शिक्षक चिह्न्ति 176 स्कूलों में से विद्यालय पर टिक लगाना होगा। जिस विद्यालय पर शिक्षक टिक लगा देगा, स्कूल उसके नाम आवंटित हो जाएगा।

पहले दिव्यांगों को मौका

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विनय कुमार ने बताया कि काउंसिलिंग में सबसे पहले दिव्यांग महिला और पुरुषों को लिया जाएगा। उसके बाद महिला और फिर बाद में पुरुषों की काउंसिलिंग होगी। इसी तरह से विद्यालय चयन का भी मौका दिया जाएगा।

मनचाहा विद्यालय पाने की मची होड़

गैर जनपद से तबादला होकर आए शिक्षकों ने नजदीकी विद्यालयों में पो¨स्टग कराने के लिए जोड़-तोड़ शुरू कर दिया है। बंकी, मसौली, देवा, निंदूरा में लखनऊ के करीबी क्षेत्रों में मारामारी मच गई है। शिक्षकों को वहीं भेजा जाएगा, जहां शिक्षक नहीं हैं।

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