जरा सोचिए:- एचआरए बढ़ने से 2223 करोड़ का बोझ, 175 करोड़ अतिरिक्त खर्च आएगा सीसीए दोगुना किए जाने से

एचआरए बढ़ने से 2223 करोड़ का बोझ

सीसीए के लिए शहरों को चार श्रेणियों में बांटा

एचआरए के बढ़ने से राज्य सरकार पर 2223 करोड़ रुपये सालाना का अतिरिक्त खर्च आएगा। जिसमें पहली अगस्त 2016 से लागू 20 फीसदी एचआरए वृद्धि का 500 करोड़ सालाना का अतिरिक्त खर्च शामिल है। इस तरह कुल अतिरिक्त खर्च 1723 करोड़ रुपये आएगा।

अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव मित्तल ने बताया कि आखिरी बार पहली दिसंबर 2008 यानी छठे वेतन आयोग की सिफारिश के आधार पर इन भत्तों में वृद्धि की गई थी। एचआरए के लिए शहरों की श्रेणी में संशोधन की भी जानकारी दी। बताया कि फीरोजाबाद उच्चतम श्रेणी के शहरों में शामिल कर लिया गया है। उच्चतम श्रेणी के यानी ए-कैटेगरी के शहरों की संख्या 14 से बढ़कर 15 हो गई है। इनमें पांच लाख से ऊपर की आबादी के शहर शामिल हैं। बी-श्रेणी के शहरों में 50 हजार से लेकर पांच लाख तक की आबादी के शहर शामिल हैं। जिसमें सभी जिला मुख्यालय और 121 नगरीय क्षेत्र शामिल हैं। सीसीए को दोगुना करने के बारे में बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार एक लाख या उससे ज्यादा आबादी के शहरों में सीसीए मिलेगा।

सीसीए के लिए शहरों को चार श्रेणी में बांटा गया है। उसी के अनुसार सीसीए दिया जाएगा। ए-श्रेणी में लखनऊ, कानपुर और नोएडा शामिल है। बी श्रेणी में बनारस, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद शामिल हैं। सी-श्रेणी में बरेली, गाजियाबाद, गोरखपुर, मुरादाबाद और अलीगढ़ हैं। डी-श्रेणी के शहरों में एक लाख से ऊपर की आबादी के शहर हैं।

175 करोड़ अतिरिक्त खर्च आएगा सीसीए दोगुना किए जाने से


जरा सोचिए:- एचआरए बढ़ने से 2223 करोड़ का बोझ, 175 करोड़ अतिरिक्त खर्च आएगा सीसीए दोगुना किए जाने से

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