प्रदेश के 50,000 से ज्यादा प्राथमिक शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से राहत

प्रदेश के 50,000 प्राथमिक अध्यापकों को मिली राहत

उत्तर प्रदेश के करीब 50,000 से ज्यादा प्राथमिक शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। फिलहाल उनकी नौकरी नहीं जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिये हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली शिक्षकों की याचिका पर नेशनल काउंसिल आफ टीचर्स एजूकेशन (एनसीटीई) व उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भी जारी किया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गत 30 मई को दिए गए फैसले में कहा था कि जिन लोगों का टीईटी रिजल्ट पहले आया और बीएड या बीटीसी का रिजल्ट बाद में आया उनका टीईटी प्रमाणपत्र वैध नहीं है। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिया था कि वे ऐसे शिक्षकों की पहचान कर उन्हें नौकरी से बेदखल करें। हाईकोर्ट ने ये प्रक्रिया दो महीने में पूरी करने को कहा था। दो महीने की समय सीमा 30 जुलाई को खत्म हो रही थी। उत्तर प्रदेश के करीब 550 प्राथमिक शिक्षकों ने तीन याचिकाओं के जरिये हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। 1शुक्रवार को न्यायमूर्ति अरुण मिश्र व न्यायमूर्ति एस.अब्दुल नजीर की पीठ ने याचिकाओं पर आर वेंकट रमणी व रूपाली चतुर्वेदी की दलीलें सुनने के बाद एनसीटीई और उत्तर प्रदेश सरकार व उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में याचिका का जवाब मांगा है। इसके साथ ही कोर्ट ने अंतरिम तौर पर हाईकोर्ट के आदेश पर यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिये। इससे पहले वकीलों की बहस सुनकर न्यायाधीश अरुण मिश्र ने कहा कि इस पूरे मामले में एनसीटीई के नियमों में दिये गये शब्द पसरुइँग (करते रहना) की व्याख्या जरूरी है ताकि पूरे देश में एकरूपता बनी रहे। ये सारा विवाद एनसीटीई के नियम 5(1) व 5(2) की व्याख्या से जुड़ा है।

संबंधित पेज15।1माला दीक्षित ’ नई दिल्ली1उत्तर प्रदेश के करीब 50,000 से ज्यादा प्राथमिक शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। फिलहाल उनकी नौकरी नहीं जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिये हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली शिक्षकों की याचिका पर नेशनल काउंसिल आफ टीचर्स एजूकेशन (एनसीटीई) व उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भी जारी किया है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गत 30 मई को दिए गए फैसले में कहा था कि जिन लोगों का टीईटी रिजल्ट पहले आया और बीएड या बीटीसी का रिजल्ट बाद में आया उनका टीईटी प्रमाणपत्र वैध नहीं है। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को आदेश दिया था कि वे ऐसे शिक्षकों की पहचान कर उन्हें नौकरी से बेदखल करें। हाईकोर्ट ने ये प्रक्रिया दो महीने में पूरी करने को कहा था। दो महीने की समय सीमा 30 जुलाई को खत्म हो रही थी। उत्तर प्रदेश के करीब 550 प्राथमिक शिक्षकों ने तीन याचिकाओं के जरिये हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

शुक्रवार को न्यायमूर्ति अरुण मिश्र व न्यायमूर्ति एस.अब्दुल नजीर की पीठ ने याचिकाओं पर आर वेंकट रमणी व रूपाली चतुर्वेदी की दलीलें सुनने के बाद एनसीटीई और उत्तर प्रदेश सरकार व उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में याचिका का जवाब मांगा है। इसके साथ ही कोर्ट ने अंतरिम तौर पर हाईकोर्ट के आदेश पर यथास्थिति कायम रखने के आदेश दिये। इससे पहले वकीलों की बहस सुनकर न्यायाधीश अरुण मिश्र ने कहा कि इस पूरे मामले में एनसीटीई के नियमों में दिये गये शब्द पसरुइँग (करते रहना) की व्याख्या जरूरी है ताकि पूरे देश में एकरूपता बनी रहे। ये सारा विवाद एनसीटीई के नियम 5(1) व 5(2) की व्याख्या से जुड़ा है।

प्रदेश के 50,000 से ज्यादा प्राथमिक शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से राहतप्रदेश के 50,000 से ज्यादा प्राथमिक शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से राहत
प्रदेश के 50,000 से ज्यादा प्राथमिक शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट से राहत

Post a Comment

[blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

(cc) Some Rights Reserved. Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget