बीएड की हजारों सीटें रह गयी खाली, सीधे दाखिले के लिए अभी कतार में 46 हजार अभ्यर्थी

बीएड की हजारों सीटें रह गयी खाली

सीधे दाखिले के लिए अभी कतार में 46 हजार अभ्यर्थी

डायरेक्ट एडमीशन में 15 तक की मोहलतबीएड की है 186000 सीटें

लखनऊ (एसएनबी)। प्राइमरी स्कूलों में बीएड उपाधि वालों को अध्यापन की मंजूरी होने के बाद भी प्रदेश भर में बीएड की हजारों सीटें खाली रह गयी हैं। राज्य स्तरीय संयुक्त बीएड प्रवेश प्रक्रिया के पूरा होने में अब दो दिन ही बचे हैं, इसके बाद भी सीधे काउंसिलिंग से 61 हजार से ज्यादा ही प्रवेश हो पाये हैं। इन सीटों में भी अंतिम प्रवेश होने तक संख्या और कम हो सकती है। शासन ने बड़ी संख्या में बीएड की रिक्त सीटें भरने के लिए सीधे प्रवेश की मंजूरी दी तो 46 हजार से ज्यादा आवेदन आ गये। इन सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के लिए शासन की मंजूरी से 15 जुलाई तक दाखिले की औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया है। उल्लेखनीय है कि राज्य स्तर पर जेईई बीएड का जिम्मा लखनऊ विविद्यालय को मिला था।

विविद्यालय ने सभी राज्य विवि से सम्बद्ध बीएड की सीटों का ब्योरा लिया तो तकरीबन एक लाख 86 हजार सीटें उपलब्ध थी। प्रवेश प्रक्रिया की खास बात है कि राजकीय व एडेड डिग्री कालेजों की तो सभी सीटें फुल हो गयी हैं, जबकि प्राइवेट बीएड कालेज प्रबंधन अभी भी सीटें फुल होने की उम्मीद लगाये हैं। अब दिलचस्प रहेगा कि ऑन लाइन काउंसिलिंग के जरिये जहां अभ्यर्थी प्रवेश प्रक्रिया से दूर रहे, वहीं सीधे एडमिशन की छूट मिलते ही 46 हजार अर्जियां आ गयी हैं। बीएड प्रवेश प्रक्रिया के राज्य समन्वयक लविवि प्रोफेसर नवीन कुमार ने बताया कि 15 जुलाई को सभी दाखिले पूरे कर लिए जाएंगे।, राज्य सरकार व सुप्रीम कोर्ट दोनों के स्तर पर पहले ही निर्देश जारी कर दिये जा चुके हैं। उल्लेखनीय है कि शिक्षा का अधिकार अनिवार्य व नि:शुल्क शिक्षा अधिनियम (आरटीई एक्ट ) लागू होने के बाद बीएड उपाधि को प्राथमिक शिक्षा में अध्यापक के अमान्य कर दिया गया, इसके बाद से बीएड में दाखिला लेने वालों की संख्या में लगातार कमी आयी। कई वर्ष बाद गत दिनों राज्य अध्यापक शिक्षा परिषद ने ब्रिज कोर्स की शर्त के साथ बीएड को प्राथमिक शिक्षा में अध्यापक के लिए बहाल तो कर दिया, लेकिन फिलहाल इस बार राज्य स्तर पर दाखिले को लेकर बीएड की चमक फीकी रही है। सीधे काउंसलिंग व डायरेक्ट एडमिशन के लिए आयी सभी अर्जी को शत-प्रतिशत टर्न आउट मान भी ले, तो भी अभी 70 हजार से ज्यादा सीटें खाली रहने का अंदेशा है।



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