अन्तर जनपदीय तबादला नीति में सरकार व बेसिक शिक्षा विभाग से जवाब-तलब

अन्तर जनपदीय तबादला नीति में सरकार व बेसिक शिक्षा विभाग से जवाब-तलब


इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने प्राथमिक विद्यालयों के अध्यापकों के लिए लागू अन्तर जनपदीय तबादला नीति में आठ जिलों को शामिल नहीं करने पर प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग से जवाब मांगा है। इन जिलों को अति पिछड़ा मानते हुए यहां तैनात शिक्षकों पर तबादला नीति नहीं लागू करने के निर्णय को याचिकाएं दाखिल कर चुनौती दी गयी है। रंजना सिंह और कई अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी सुनवाई कर रहे हैं। याचिकाओं पर वरिष्ठ अधिवक्ता राधा कान्त ओझा, सीमांत सिंह, शैलेन्द्र आदि ने पक्ष रखा।

याचीगण का कहना है कि प्रदेश सरकार ने 13 जून 2018 को अन्तर जनपदीय तबादले का परिणाम घोषित किया। इसी दिन एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा गया कि प्रदेश के आठ जिलों सिद्धार्थ नगर, बहराइच, सोनभद्र, चन्दौली, फतेहपुर, श्रावस्ती, चित्रकूट और बलरामपुर अति पिछड़े जिले हैं। इसलिए यहां से किसी भी शिक्षक का अन्तर जनपदीय तबादला नहीं किया जायेगा। मगर यदि कोई शिक्षक इन जिलों में आना चाहता है तो उसका स्थानांतरण कर दिया जायेगा।याचीगण का कहना था कि स्थानांतरण नीति जून 2017 में जारी की गयी इसके बाद ही उन्होंने ऑनलाइन आवेदन कर दिया था। सरकार का आदेश 13 जून 2018 को आया है। इसलिए उन पर लागू नहीं होगा। क्योंकि वह आदेश आने से पूर्व आवेदन कर चुके थे। कोर्ट ने जानना चाहा है कि 13 जून का आदेश क्या किसी नीति के तहत जारी किया गया है या इसके लिए कोई वैधानिक नियम है। याचिका पर 23 जुलाई को अगली सुनवाई होगी।


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