जागरूकता के मंत्र से भगा रहे बीमारी ये ‘बाल क्रांतिकारी’

जागरूकता के मंत्र से भगा रहे बीमारी ये ‘बाल क्रांतिकारी’
jagrukata ke mantra se bhaga rahe bimari ye 'Bal Krantikari'

मच्छरजनित बीमारियों के खिलाफ जंग के नायक बनकर उभरे हैं बच्चे, घर-घर जाकर लोगों को कर रहे जागरूक, बताते हैं बीमारी के कारक


विपिन है इस सेना का नायक


बहराइच तराई और पूर्वाचल के जिलों में ह साल जेई, एईएस व अन्य बीमारियों की चपेट में आकर हजारों लोग अस्पताल पहुंचते हैं। कई बार अस्पताल पहुंचने के बाद भी जान बचाना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में बहराइच के सर्वाधिक पिछड़े विकास खंडों में से एक बलहा के चंदन खास गांव में ‘बाल क्रांतिकारी’ सेना ने बीमारियों के खिलाफ जागरूकता का बिगुल फूंक दिया है। बाल क्रांतिकारियों की यह सेना खड़ी की है पूर्व माध्यमिक विद्यालय चंदनपुर खास के शिक्षक हेमंत कुमार यादव ने। उन्होंने ऐसे बच्चों की टीम तैयार की है जो जानलेवा जापानी इंसेफ्लाइटिस/एक्यूट इंसेफ्लाइटिस (जेई/एईएस) के खिलाफ जंग के नायक बनकर उभरे हैं।110 बीमारी, 10 क्रांतिकारी1शिक्षक हेमंत कुमार यादव ने लोगों को खासतौर पर गंदगी के कारण होने वाली व मच्छरजनित बीमारियों से लड़ने के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए 10 बच्चों की बाल क्रांतिकारी सेना तैयार की है। यह विचार तहसील नानपारा में लगे एक टीकाकरण कैंप के बाद आया। यहां प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने अपने विद्यालय के बच्चों को प्रेरित किया। अब कक्षा छह के विपिन जायसवाल जापानी इंसेफ्लाइटिस, रोशनी फाइलेरिया, सौरव डेंगू, अंजुम बानो स्वाइन फ्लू, सादिया मलेरिया, कक्षा आठ के फरमान टीबी, दुर्गा प्रसाद ओझा हैजा, कक्षा आठ की शिफा खसरा, कक्षा सात के नूरुल इस्लाम पीलिया व कक्षा छह की बिल्कीस बानो चिकनगुनिया के बारे में अपने गांव के लोगों को जागरूक कर रहे हैं।

बहराइच : बलहा ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय चंदनपुर खास के शिक्षक हेमंत कुमार यादव और बीमारियों के खिलाफ बिगुल बजा रहे बाल क्रांतिकारी कक्षा छह का छात्र विपिन कुमारमच्छरजनित बीमारियों के प्रति जागरूक करने के लिए विद्यालय में खड़ी बच्चों की टीम ’ जागरणबाल क्रांतिकारियों में विपिन कुमार का नाम खास है। विपिन ने अपने शिक्षक की बातों को न केवल समझा, बल्कि उसे एक नए स्तर पर ले गया। कक्षा छह के छात्र विपिन के पिता ओंकार पांच बीघा जमीन के छोटे से किसान हैं। विपिन स्कूल के बाद नियमित रूप से विशेष सत्र लेता है। स्कूल के अन्य साथियों के साथ कई रचनात्मक चार्ट भी बनाए हैं। जेई/एईएस पर एक निबंध भी लिखा है। स्कूल से आने के बाद वह गांव में घर-घर जाकर लोगों को इन रोगों की कहानी जुबानी बताता है। शिक्षक हेमंत कुमार कहते हैं कि विपिन जैसे बच्चों की जरूरत है, जो स्वयं प्रेरित है और इस बीमारी से लड़ने के लिए तैयार है।


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गांव के 40 फीसद लोग हुए जागरूक1शिक्षक हेमंत बताते हैं कि बच्चों की टीम गांव के 40 फीसद लोगों को जागरूक कर चुकी हैं। इसी महीने शिक्षा सत्र शुरू होने के बाद यह अभियान शुरू किया गया है। जागरूकता मुहिम के दौरान वह खुद भी बच्चों के साथ रहते हैं।

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