परिषदीय विद्यालयों में प्रति बच्चे पर कान्वेंट स्कूल से ज्यादा होता है खर्च

हर बच्चे पर कान्वेंट स्कूल से ज्यादा होता है खर्च

संवादसूत्र, बाराबंकी : परिषदीय विद्यालयों के नौनिहालों पर सरकार कान्वेंट के बच्चों से भी अधिक खर्च कर रही है। सरकारी विद्यालयों के प्रति बच्चे की शिक्षा पर प्रतिमाह 1526 रुपये खर्च सरकार करती है, लेकिन शिक्षा का स्तर नहीं बन पा रहा है। सरकारी स्कूलों में सुविधाएं व शिक्षक बढ़ रहे हैं पर शिक्षा की गुणवत्ता घट रही है। 1जिले में सवा तीन लाख बच्चों में प्रति वर्ष करीब 595 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। जिसमें बच्चों को एमडीएम, ड्रेस, बैग, किताबें, जूते, मोजा, स्वेटर मिलते हैं। प्रति बच्चे पर प्रतिमाह 1526 रुपये खर्च आ रहा है। बच्चों को पढ़ाने के लिए तैनात किए गए 9591 शिक्षकों पर करीब 48 करोड़ रुपये से अधिक वेतन सरकार दे रही है।

इसके इतर निजी कान्वेंट स्कूलों में बच्चों पर प्रतिमाह 12 सौ से 14 सौ रुपये फीस होती है। अभिभावक कह रहे कि आखिर परिषदीय विद्यालय में शिक्षा गुणवत्ता क्यों ठीक नहीं है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विनय कुमार का कहना है कि उत्तरोत्तर शिक्षा का स्तर उठाए जाने पर कार्य शुरू हो गया है। उम्मीद यह है कि अब जिले के हर ब्लॉकवार विद्यालयों को कान्वेंट स्कूल की तर्ज पर जल्द विकसित किया जाएगा।

परिषदीय विद्यालयों में प्रति बच्चे पर प्रतिमाह 1526 रुपये खर्च

कान्वेंट स्कूलों की फीस से ज्यादा भार उठाती है सरकार

सुविधाएं बढ़ीं, घट गई शिक्षा की गुणवत्ता


परिषदीय विद्यालयों में प्रति बच्चे पर कान्वेंट स्कूल से ज्यादा होता है खर्च

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