परिषदीय विद्यालय : पदोन्नति के फेर में कई वर्ष से फंसे तीन लाख शिक्षक, पहले टीईटी करों तब होगी पदोन्नति

परिषदीय विद्यालय : पदोन्नति के फेर में कई वर्ष से फंसे तीन लाख शिक्षक


वर्ष 2007 से मामला चल रहा था हाईकोर्ट में अब नया पेंच आ गया कि पहले टीईटी करों तब होगी पदोन्नति


प्रदेश के एक लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों में शिक्षण कर रहे तीन लाख से अधिक शिक्षक - शिक्षिकाओें की पदोन्नति वर्ष 2007 से रुकी हुई है।इससे उनको विभागीय पदोन्नति के साथ ही साथ भारी आर्थिक नुकसान भी हो रहा है लेकिन विभाग के अफसर मामले के निपटारे को लेकर जरा भी गंभीर नहीं है।पहले मामला हाईकोर्ट में चल रहा था कि किस आधार पर कुछजिलों में पदोन्नति होगी।इसी बीच नया पेच आ गया है कि बिना टीईटी पास किये शिक्षकों की पदोन्नति नहंी हो सकती है।इससे शिक्षकों में भारी आक्रोश है।उनका कहना है कि नियुक्ति के लिए टीईटी तो ठीक है लेकिन पदोन्नति के लिए क्यों जरुरी है।

वह लोग मामले को कोर्ट में ले जाने की तैयारी में लग गये है। प्रदेश में सवा लाख परिषदीय विद्यालय और करीब 50 हजार जूनियर हाईस्कूल है।इस प्रकार से परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक-शिक्षिकाओं की संख्या चार लाख है।लखनऊ, इलाहाबाद, वाराणसी, कानपुर, कन्नौज, आगरा सहित प्रदेश के सभी जिलों में वर्ष 2007 से लेकर आज तक शिक्षकों की पदोन्नति नहीं हुई है।कुछ जिलों में जहां पर शिक्षक रिटायर हो गये है वहां पर वरिष्ठ शिक्षकों को प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी जरुर दे दी गयी है लेकिन उनको पदोन्नति करके रिक्त पदों पर तैनाती नहीं दी गयी है।सबसे बड़ी बात यह है कि हाईकोर्ट में किसी एक जिले का एक मामला हो सकता है उसकी वजह से पूरे प्रदेश में शिक्षकों की पदोन्नति 11 वर्षसे रुकी हुई है।इससे वह परेशान होकर सचिव बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय एवं अपने जिले के बीएसए कार्यालय का चक्कर लगा रहे है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।


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