हाल-ए-स्कूल:- जान जोखिम में डालकर पढ़ रहे 84 बच्चे
haal-e-school:- jaan zokhim me dalkar padh rahe bachche

परिषदीय स्कूलों की हकीकत देखनी हो तो आप मुजेहना शिक्षा क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय बनकसिया शिवरतन सिंह चले आइए। यहां आपको सरकारी स्कूल की जो तस्वीर दिखेगी उसे देखकर आप चौंकने पर विवश हो जाएंगे। .

बाहर से सजाया संवारा गया यह स्कूल भीतर से इस कदर जर्जर हो चुका है कि इसके कमरों मे बैठना तो दूर आप सांस भी नहीं ले पाएंगे। सीलन भरी दीवारें,जर्जर छत और उस पर जीर्ण शीर्ण दशा मे लटकता पंखा देखकर आप पढ़ना तो दूर वहां बैठना भी भूल जाएंगे। बावजूद इसके इन जर्जर कमरों मे स्कूल मे पंजीकृत 84 नौनिहाल अपनी जान हथेली पर लेकर शिक्षा ग्रहण करने को विवश हैं। स्कूल के प्रधानाध्यापक कई बार इसकी लिखित सूचना विभागीय अवसरों को उपलब्ध करा चुके हैं मगर अफसर हैं कि इस पर कार्रवाई करने के बजाय कागजों में सरकारी स्कूलों को कान्वेंट बना रहे हैं। मुजेहना के बनकसिया शिवरतन सिंह गांव में आजादी के बाद वर्ष 1954 में प्राथमिक विद्यालय का निर्माण कराया गया था। उस समय यह विद्यालय अपने क्षेत्र का आदर्श विद्यालय हुआ करता था। मगर समय के साथ यह विद्यालय बदहाल होता चला गया। शिक्षा व्यवस्था में बदलाव का डंका पीटने वाले अफसर सिर्फ कागजों मे व्यवस्था को बदलने का दावा करते रहे मगर मौके पर जाने की जरूरत नहीं समझी। .

नतीजा यह हुआ कि इस स्कूल में बने कमरे जर्जर हो गए। 74 वर्ष पुराने इस स्कूल में वर्तमान समय मे 84 बच्चों का नामांकन है। कुछ बच्चे बगैर नामांकन के भी स्कूल में आ जाते हैं। मगर इनके बैठने की व्यवस्था अत्यंत दयनीय है। सीलन भरे कमरे और लटकती छत के बीच जर्जर कमरों मे इन्ही जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक तुलसीराम शुक्ला इसकी लिखित सूचना विभाग के आला अवसरों को दे चुके हैं मगर नतीजा ढाक के तीन पात है। इस सूतना पर स्कूल की मरम्मत को दूर विभाग का कोई जिम्मेदार अफसर अब तक विद्यालय को देखने तक नहीं जा सका है। प्रधानाध्यापक का कहना है कि ठंढी व गर्मी मे तो किसी तरह से स्कूल के परिसर मे बैठकर बच्चों को पढाया जाता है लेकिन बरसात मे स्थित सचमुच भयावह हो जाती है। बरसात मे स्कूल मे बैठना तो दूर कमरों मे जाने से भी डर लगता है। स्कूल की छत कब भरभराकर गिर जाए इसका कोई भरोसा नहीं है।गांव के रहने वाले मनोज सिंह ने बताया कि वह इसकी शिकायत जिलाधिकारी से भी कर चुके हैं फिर भी सुधार नहीं हुआ। .

प्राथमिक विद्यालय बनकसिया शिवरतन सिंह के संबंध में जानकारी नहीं हैं। अगर स्कूल जर्जर है तो वहां बच्चों को बैठकर पढ़ाना खतरनाक हो सकता है। अगर मरम्मत के लायक हुआ को स्कूल की मरम्मत कराई जाएगी। -रमाकांत वर्मा, बीएसए.

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