सरकारी स्कूल के बच्चों की ड्रेस में खुलेआम हो रहा खेल, सेटिंग के खेल में किनारे हुई यूनीफार्म की फिटिंग

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सेटिंग के खेल में किनारे हुई यूनीफार्म की फिटिंग

सरकारी स्कूल के बच्चों की ड्रेस में खुलेआम हो रहा खेल, 120 रुपये से 150 और 160 रुपये की दी जा रही ड्रेस


जागरण संवाददाता, हरदोई: परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की ड्रेस में घमासान मचा हुआ है। सेटिंग के खेल में फिटिंग किनारे हो गई है। न कहीं नाप हुई और न ही टेलरों से ड्रेस सिलवाई गई। ठेके पर सिलाई गई ड्रेस विद्यालयों में थोपी जा रही हैं और धड़ल्ले से मानकों की धज्जियां उड़ रही हैं। सबसे खास बात तो यह कि सब कुछ जानते हुए भी जिम्मेदार चुपचाप तमाशा देख रहे हैं।

परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले करीब चार लाख 52 हजार बच्चों को दो सेट स्कूली ड्रेस दी जानी हैं। वैसे व्यवस्था के अनुसार कपड़ा खरीद कर बच्चों की नाप के अनुसार ड्रेस सिलवाई जानी चाहिए लेकिन हर वर्ष की तरह इस बार भी शासनादेश की धज्जियां उड़ रही हैं। न कहीं नाप ली गई और न ही सिलवाई गईं।

ठेकेदार खुलेआम मनमाने मूल्य पर विद्यालयों में ड्रेस पहुंचा रहे हैं। ठेकेदार भी कोई अधिकारी का है तो कोई स्थानीय नेता का आशीर्वाद प्राप्त है। 200 रुपये प्रति बच्चा प्रति सेट के स्थान पर 120 रुपये से लेकर अधिकतम 150 और 160 रुपये की ड्रेस दी जा रही है। अध्यापकों का कहना है कि चाह कर भी वह मना नहीं कर पाते। एक एक विद्यालय में कई कई ठेकेदार पहुंच रहे हैं। 31 जुलाई तक ड्रेस वितरण पूरा करने के लिए न गुणवत्ता देखी जा रही है और न ही व्यवस्था। बस घमासान मचा हुआ है। जिला समन्वयक सामुदायिक सहभागिता राजीव कुमार मिश्र ने बताया कि गुणवत्ता पूर्ण ड्रेस वितरण के आदेश हैं और खामी मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी।

स्पर्श के नाम पर हो रहा खेल1विद्यालयों में ब्रांडेड कंपनी के कपड़े की ड्रेस बनवाने का आदेश है। कंपनी के नाम पर भी खेल हो रहा है। ठेकेदारों ने खास डिमांड पर कपड़ा मंगवा रखा है। ड्रेस इस तरह से सिलवाई जा रही है जिसमें कंपनी का नाम ऊपर दिखता। आपूर्ति करने वाले ठेकेदार बस एक ही बात स्पर्श कर देखो। कहते हैं और उसके पीछे क्या है यह किसी को पता नहीं है।



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