नहीं बंटीं किताबें, कैसे करें पढ़ाई, डीआईओएस के दौरे में सामने आया सच

नहीं बंटीं किताबें, कैसे करें पढ़ाई

डीआईओएस के दौरे में सामने आया सच

स्कूल खुलने के तीन महीने बाद भी किताबें, ड्रेस और बस्ते नहीं मिलने से बच्चे निराश


स्कूल खुले तीन महीने हो गए, लेकिन अभी तक बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में नि:शुल्क किताबें, ड्रेस और बस्ते बांटने का कार्य अब तक नहीं हो सका है। अभी भी करीब 40 फीसदी विद्यालयों में बच्चे पुरानी किताबों से ही पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अमरकांत सिंह ने भी दो जुलाई को स्कूल खुलने के पहले ही दिन किताबें बांटे जाने का दावा किया था, लेकिन वह भी झूठ साबित हुआ।

प्राचार्य से मांगी लिखित रिपोर्ट

जिला विद्यालय निरीक्षक(डीआईओएस) मुकेश सिंह ने जब बुधवार को पुराना किला स्थित लखनऊ मॉन्टेसरी स्कूल दौरा किया तो यह सच्चाई सामने आई। डीआईओएस को कक्षा छह की एक छात्रा ने बताया कि उसकी क्लास में अभी किताबें नहीं बंटी हैं। इससे पढ़ने में परेशानी हो रही है। डीआईओएस ने बताया कि छात्रा की शिकायत पर प्राचार्य से बात की गई है। उनसे लिखित रिपोर्ट मांगी गई है। जल्द ही किताबें उपलब्ध करवाने को कहा गया है।


वहीं अब अधिकारियों का कहना है कि शिक्षक दूसरे जिलों से तबादला लेकर आए हैं, उनको ऐसी जगह पर तैनाती दी गई है जहां कोई शिक्षक नहीं हैं, जिससे वहां शिक्षा देने के साथ बाकी काम भी जल्द पूर हो जाए।
राजधानी में बेसिक और माध्यमिक को मिलाकर शिक्षा विभाग के करीब 1800 से ज्यादा विद्यालय हैं। ग्रामीण सेक्टर के 20 और शहरी क्षेत्र के 36 विद्यालयों में एक भी शिक्षक नहीं हैं। वहीं 100 से ज्यादा विद्यालय एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। यही वजह है कि स्कूलों में शिक्षक न होने से किताब और ड्रेस का वितरण नहीं हो पाया है।
रिक्त व एकल स्कूलों में भेजे जाएंगे शिक्षक
100 से ज्यादा स्कूलों में एक शिक्षक

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