सूबे के 42 जिलों में 50 फीसद छात्रों को नहीं भा रहा एमडीएम

सूबे के 42 जिलों में 50 फीसद छात्रों को नहीं भा रहा एमडीएम

उदासीनता: बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में मध्याह्न भोजन पर खड़े हो रहे सवाल


बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों में बच्चों को परोसे जा रहे मध्याह्न भोजन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वजह चाहे जो कुछ भी हो, लेकिन सच यह है कि सूबे के गोंडा, बहराइच, श्रवस्ती समेत 42 जिलों के 50 फीसद छात्र मिड डे मील को पसंद नहीं कर रहे हैं। भारत सरकार की समीक्षा में पोल खुलने के बाद अफसर हरकत में आए हैं। अब व्यवस्था में सुधार के लिए मध्यान्ह भोजन प्राधिकरण के निदेशक अब्दुल समद ने जिलाधिकारियों को पत्र लिखा है। परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को इंटरवल में पौष्टिक भोजन देने की योजना है। इसके लिए केंद्र व राज्य सरकार योजना में नामांकित छात्रों के सापेक्ष उपस्थित का औसत निर्धारित किए हुए हैं, जिसमें राष्ट्रीय औसत 76 फीसद तथा राज्य औसत प्राथमिक स्कूल में 59 व पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 53 फीसद है। प्रतिदिन औसत के मुताबिक भोजन कराना है।

भारत सरकार की मध्यान्ह भोजन योजना की वार्षिक कार्ययोजना व वर्ष 2018-19 के बजट आवंटन को लेकर बैठक में बच्चों को भोजन कराने की उपलब्धि बहुत ही खराब मिली। जिलों में कहीं 40 तो कहीं 49 फीसद छात्रों को ही भोजन कराया गया। स्थिति पर केंद्र सरकार ने एतराज जताया। निदेशक अब्दुल समद ने चिन्हित जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर जिम्मेदारी तय करके स्थिति में सुधार के लिए कहा है।

रुचिकर नहीं बनता भोजन : सरकार ने अलग-अलग दिन के लिए मेन्यू बनाया है, लेकिन भोजन रुचिकर नहीं बनता है। जिससे बच्चे इसे कम खाना पसंद करते हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग के परिषदीय स्कूलों भरे गए सैंपल फेल हो चुके हैं। गत मंगलवार को मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी की अगुआई में टीम ने धानेपुर में कस्तूरबा विद्यालय के कैंटीन में छापेमारी की। टीम को यहां साफ सफाई व खाद्य पदार्थो का रखरखाव ठीक नहीं मिला। विशेषज्ञ बताते हैं कि इन्हीं कारणों से बच्चे भोजन नहीं करते हैं। हालांकि डीसी एमडीएम गणोश कुमार गुप्त का कहना है कि एडवायजरी जारी की गयी है।

गोंडा कटरा बाजार के पूर्व माध्यमिक विद्यालय तिलका में दूध पीतीं छात्रएं

केंद्र सरकार की समीक्षा में खुली पोल तो हरकत में आए अफसर

एमडीएम प्राधिकरण के निदेशक ने जिलाधिकारियों को लिखा पत्र1इन जिलों की उपलब्धि न्यूनतम1गोंडा, श्रवस्ती, बहराइच, सीतापुर, संभल, रायबरेली, इलाहाबाद, पीलीभीत, बाराबंकी, अलीगढ़, बदायूं, अमेठी, गोरखपुर, मुरादाबाद, शाहजहांपुर, आजमगढ़, भदोही, हाथरस, आगरा, जौनपुर, मऊ, कुशीनगर, रामपुर, कानपुर नगर, बांदा, जालौन, कासगंज, ललितपुर, मेरठ, सोनभद्र, बुलंदशहर, मुजफ्फर नगर, फिरोजाबाद, गाजियाबाद, गाजीपुर, बरेली, संतकबीर नगर, कौशांबी, फर्ररूखाबाद, मैनपुरी, देवरिया व सहारनपुर में एमडीएम खाने वाले छात्रों की संख्या कम है।




सूबे के 42 जिलों में 50 फीसद छात्रों को नहीं भा रहा एमडीएम

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