नौकरी की दुश्वारियों ने निगल लीं दस शिक्षामित्रों की जिन्दगियां

नौकरी की दुश्वारियों ने निगल लीं दस शिक्षामित्रों की जिन्दगियां
naukari ki dushvariyon ne nigal li 10 shikshamitron ki zindagiyaan

नौकरी की दुश्वारियों ने अब तक दस शिक्षामित्रों की जिन्दगियां निगल लीं हैं। उनके परिवार की आंखों से रोज कठिनाइयों के आंसू निकल रहे हैं। पिछले तीन साल में दस शिक्षामित्र नौकरी की जंग लड़ते-लड़ते जिन्दगी की जंग हार चुके हैं। नौकरी के उतार चढ़ाव से अब भी वह रोज रूबरू हो रहे हैं। उनके दुखों के घाव पर सिर्फ आश्वासन का मरहम ही लगाया जा रहा है। .
12 सितम्बर 2015

जिले में कुल 3269 शिक्षामित्र कार्यरत हैं जिसमें 194 बेसिक के हैं। वर्ष 2014 अगस्त महीने में 1108 शिक्षामित्रों के आंगन में खुशियों ने दस्तक दी थी। समायोजित होकर ये सब सहायक अध्यापक बना दिए गए थे। इसके बाद 20 जुलाई 2015 में 949 शिक्षामित्रों की झोलियां एक बार फिर खुशियों से भर गईं। दूसरे समायोजन में 949 शिक्षामित्रों को समायोजित कर सहायक अध्यापक बना दिया गया। साढ़े तीन हजार रुपयों से घिसटने वाली जिन्दगी में बहार आ गई। शेष बचे 1212 शिक्षामित्र सहायक अध्यापक बनने का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच हाईकोर्ट के एक आदेश से शिक्षामित्रों की जिन्दगी में अंधेरा छा गया। .

सुप्रीम कोर्ट से समायोजन निरस्त.

हाईकोर्ट के आदेश पर रोक .

हाईकोर्ट से समायोजन निरस्त .

समायोजन से वंचित.

दूसरे बैच में समायोजित .

पहले बैच में समायोजित .

जनपद में तैनात शिक्षामित्रों की संख्या .

प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिला मीडिया प्रभारी अवधेश मणि मिश्रा ने कहा कि सरकार जब तक कोई कारगर कदम नहीं उठाती, तब तक शिक्षामित्रों के मौत का सिलसिला नहीं रुक सकता। सरकार चाहे तो उत्तराखण्ड की तरह शिक्षामित्रों को उत्तराखण्ड की तरह सुविधा दे तो उनको राहत जरूर मिल सकती है। उन्होंने मृतक परिवार के लोगों को मुआवजा व परिवार को नौकरी दिए जाने की मांग की है। .


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