कब सुधरेंगे हालात, शिक्षा की राह में रोड़ा बनी किताबों की कमी, ऐसे में कैसे पढ़ें?

शिक्षा की राह में रोड़ा बनी किताबों की कमी, ऐसे में कैसे पढ़ें


संसू, प्रतापगढ़ : जुलाई माह की 17 तारीख बीत गई, किताबें अभी भी नदारद हैं। इससे बच्चों की पढ़ाई रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। यह कहना गलत न होगा कि नौनिहालों की शिक्षा की राह में किताबों की अनुपलब्धता रोड़ा बनी हुई है। 1

मंगलवार को जागरण टीम ने सदर विकास खंड के प्राथमिक विद्यालय चकवनतोड़ में जाकर पड़ताल की। सुबह आठ बजे विद्यालय के बच्चे दो कमरों में बैठाए गए थे। प्रधानाध्यापिका रेखा सिंह कार्यालय में बैठकर रजिस्टर बना रहीं थीं। शिक्षिका संगीता सिंह, शिक्षामित्र रूपेश ओझा व श्रद्धा मिश्र बच्चों को पढ़ा रहे थे। रसोइया मिड डे मील बनाने की तैयारी में दिखी। इस विद्यालय में पंजीकृत 79 बच्चों में से 55 आए थे। अधिकांश बच्चे ड्रेस में थे तो कुछ रंग बिरंगे कपड़ों में नजर आए। कक्षा तीन के आर्यन प्रताप सिंह, ¨प्रस, कक्षा पांच के नितिन व शशि सिंह से प्रदेश के मुख्यमंत्री व देश के प्रधानमंत्री का नाम पूछा गया तो सही बताया। इतना जरूर था कि बच्चे देश व प्रदेश की राजधानी नहीं बता सके। कक्षा पांच के विजय सिंह ने 15 तक का पहाड़ा सुनाया। बच्चों ने बताया कि अभी तक पाठ्यपुस्तकें नहीं मिल सकी हैं।

इस विद्यालय में प्रधानमंत्री का स्वच्छता अभियान दम तोड़ता नजर आया। बनाया गया शौचालय पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। दरवाजे टूट चुके हैं। इससे बच्चों के साथ शिक्षिकाओं को भी परेशानी उठानी पड़ रही है। इसके साथ ही स्कूल में पेयजल के लिए लगवाया गया हैंडपंप सार्वजनिक हो गया है। इससे पानी लेने को गांव के लोग ही लाइन लगाए रहते हैं। विद्यालय के रास्ते को भी अवरुद्ध कर दिया गया है। किसी तरह सकरे रास्ते से बच्चे स्कूल पहुंचते हैं।

कब सुधरेंगे हालात, शिक्षा की राह में रोड़ा बनी किताबों की कमी, ऐसे में कैसे पढ़ें?

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