स्कूल के बगल में पड़ावघर, दो साल में 36 से छह हो गए बच्चे

नगर विकास मंत्री ने भी किया था दौरा

डीएम की चेतावनी पर भी नहीं सुधरे हालात

दूसरे विद्यालय में शिफ्ट करने का भी प्रावधान

स्कूल के बगल में पड़ावघर, दो साल में 36 से छह हो गए बच्चे

स्कूल के बगल गंदगी और बदबू को लेकर स्थानीय लोग नगर विकास मंत्री सुरेश खन्ना तक से शिकायत कर चुके हैं। तीन महीने पहले सुरेश खन्ना ने इलाके में दौरा किया था तब लोगों ने यह समस्या बताई थी। स्थिति यह कि मांस टुकड़े तक यहां पड़े रहते हैं, जिसको पक्षी हर वक्त नोचते रहते हैं।
घसियारी मंडी प्राथमिक विद्यालय के बगल में पड़ावघर से परेशान हो रहे बच्चे।
आठ जुलाई को स्कूल दौरे पर

पहुंचे जिलाधिकारी और नगर आयुक्त ने नाराजगी जताते हुए बीएसए को सफाई व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए थे। साथ ही हर 15 दिन पर विशेष सफाई के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कूड़ा डालने वाले सुधरने को तैयार नहीं है। यहां मंगलवार को आए विद्यार्थी बदबू की वजह जल्द वापस घर चले गए।
नियम यह है कि अगर किसी विद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या 10 से कम हो तो उस स्कूल को किसी अन्य विद्यालय में शिफ्ट किया जाता है। यहां दो शिक्षक और छह विद्यार्थी हैं। इसमें एक शिक्षक के पास बीएसए कार्यालय से अन्य काम भी मिले हैं, जिसमें इलाके के बाकी प्राइवेट और सरकारी स्कूलों की जानकारी देना और उसकी मॉनिटरिंग करना। ऐसे में हर समय एक शिक्षक और बाकी अन्य कर्मचारी हैं। अर्चना सिंह ने बताया कि उन्होंने यहां की स्थिति को लेकर कई बार शिकायत की है, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
घसियारी मंडी प्राथमिक विद्यालय का बुरा हाल

विद्यालय के बगल बने पड़ावघर से बच्चे हो रहे बीमार

बच्चों को पढ़ाने से कतरा रहे अभिभावक


यह समस्या गंभीर है। स्कूल या कूड़ाघर दोनों में से किसी एक को हटाना पड़ेगा। सीनियर स्तर पर बात की गई है। जल्द ही समस्या का समाधान निकाला जाएगा।

नगर निगम में इसे लेकर बात की गई है। वहां वास्तव में पढ़ाना मुश्किल है। जल्द ही कूड़ाघर को कहीं और शिफ्ट किया जा


स्वच्छ भारत मिशन(शहरी) के तहत देश में एक ओर सफाई की मुहिम चल रही है, तो वहीं शहर का लालबाग स्थित घसियारी मंडी प्राथमिक विद्यालय कूड़ाघर बना हुआ है। विद्यालय के बगल में पड़ावघर होने से अभिभावक बच्चों को पढ़ाने से कतरा रहे हैं। स्थिति यह है कि पहले जहां स्कूल में लगभग 40 बच्चे पढ़ते थे, अब दो साल में संख्या घटकर छह हो गई है। बदबू और गंदगी से बीमार पड़ रहे बच्चों की स्थिति को देखते हुए अभिभावकों ने स्कूल से नाम कटवा लिया है। घसियारी मंडी की शिक्षिका अर्चना सिंह का कहना है कि कूड़े-कचरे के बीच पढ़ने से बच्चे बीमार पड़ रहे हैं। इसे लेकर अभिभावकों ने लिखित शिकायत की है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि अव्यवस्था का शिकार होकर बच्चे आने वाला कल कैसे संवारेंगे।


स्कूल के बगल में पड़ावघर, दो साल में 36 से छह हो गए बच्चे

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