परिषदीय स्कूलों में स्वच्छता हुई धड़ाम

संसू, अंबेडकरनगर : बेसिक शिक्षा विभाग की बदहाल तस्वीर को संवारने में जिम्मेदार उदासीन बने हैं तो इसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर सेंध लगी है। यही वजह है कि विद्यालय की ओर छात्र रूख करने से कतराते हैं। फिलहाल शौचालयों की बात की जाए तो बेसिक शिक्षा विभाग सभी परिषदीय विद्यालयों को शौचालय की सुविधा से लैश होने का दावा करता है। यही नहीं इन शौचालयों के क्रियाशील होने तथा छात्रों को इसका शतप्रतिशत लाभ मिलने का भी विभाग दम भरता है। हालांकि धरातल पर हकीकत ठीक इसकी उलट है, और बड़ी संख्या में शौचालय निष्प्रयोज्य पड़े हैं।

भारत सरकार के कदम से कदम मिलाते हुए प्रदेश सरकार भी स्वच्छ भारत मिशन की उम्मीदों को साकार करने में जुटी है। हालांकि सरकार की इस मंशा को उसकी सरकारी मशीनरी ही नाकाम बनाने में सहभागी बन गई है। खुले में शौचमुक्त बनाने के लिए सरकार की ओर से व्यापक अभियान भी छेड़ा गया है। लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों में इस अभियान की हवा निकल चुकी है। वजह स्कूलों में आने वाले छात्रों को खुले में नित्यक्रिया के लिए जाना पड़ता है। छात्र तो किसी तरह से काम चला लेते हैं, लेकिन छात्रों को इससे काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा रहा है। ऐसे में छात्रओं की उपस्थिति भी प्रभावित होती है। जबकि बेटियों को पढ़ाने के लिए भी सरकार विशेष प्रयास कर रही है।

वजह खंगालने पर एक बात सामने आयी की विद्यालयों में बनाए गए शौचालय मानक और गुणवत्ता के विपरीत रहे। लिहाजा प्रयोग किए जाने से पहले ही यह ध्वस्त हो चुके हैं। तमाम विद्यालयों में शौचालय का ताला तक ही नहीं खुला है। खास बात है कि शौचालयों के निर्माण के लिए तो बेसिक शिक्षा विभाग बजट देता है, लेकिन इसकी मरम्मत के लिए उसके बजट में कोई इंतजाम नहीं किया गया है। इन हालात में ध्वस्त हुए शौचलायों की दशा नहीं सुधारी जा सकी है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक करीब 97 विद्यालयों में ही शौचालय निष्प्रयोज्य है। जबकि हकीकत में यह आंकड़ा दो से तीन सौ विद्यालयों में देखने को मिलता है। फिलहाल शासन ने इसे संवारने के लिए ग्राम पंचायतों को जिम्मेदारी सौंपी है। इससे इतर सफाईकर्मचारियों की लापरवाही के कारण विद्यालयों में गंदगी का अंबार लगा है। 1शौचलायों तथा हैंडपंपों के आसपास गंदगी पसरी रहती है।

इसे साफ नहीं करने से छात्र शौचालय के पास नहीं जाते हैं। वजह छात्रों को यहां जहरीले जीवों का डर सताता है। जिला पंचायतराज अधिकारी मयाशंकर मिश्र ने बताया कि ग्राम पंचायतों में प्रधान तथा सचिव को विद्यालयों के शौचालयों को क्रियाशील बनाने के लिए निर्देशित किया गया है। इसके अलावा सफाई कर्मचारियों को विद्यालयों में नियमित सफाई के लिए भी कहा गया है। इसका गांवों में पहुंचकर लगातार निरीक्षण भी किया जा रहा है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अतुल कुमार ने बताया कि शौचालयों को दुरुस्त कराया जाएगा।


परिषदीय स्कूलों में स्वच्छता हुई धड़ाम

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