पटरी पर नहीं आया मिड डे मील वितरण


शिक्षक भी खाएं मिड डे मील

प्राइमरी विद्यालयों में बंट रहे मिड डे मील का उद्देश्य भले ही कुछ भी हो, मगर इससे बालकों को लाभ मिल रहा है। किसी समय प्राइमरी विद्यालयों में बालकों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही थी। मिड डे मील लागू होने के बाद से विद्यालयों में बालकों की संख्या में इजाफा हुआ है। अब जरूरत है कि मिड डे मील की गुणवत्ता पर ध्यान दिया जाए। जो भी मिड डे मील बालकों को मिल रहा है, वही शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को भी खाना चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए। वह अलग-अलग विद्यालयों में समय-समय पर मिड डे मील बच्चों के साथ खुद खाएं। अगर बच्चों को मिल रहा मिड डे मील शिक्षक और अधिकारी भी खाएंगे तो उसकी गुणवत्ता उच्च स्तरीय होगी। बच्चों को मिलने वाले मिड डे मील में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं हो सकेगा।

डॉ. अभिषेक शर्मा, आयुर्वेदिक चिकित्सक

गिर रहा शिक्षा का स्तर

मिड डे मील बांटने के मामले में पहली प्राथमिकता इसकी गुणवत्ता पर ध्यान देने की है। कई विद्यालयों में देखने को मिला है कि जो बच्चे पढ़ने आ रहे हैं, वे केवल मिड डे मील का इंतजार करते देखे जाते हैं। जब मिड डे मील लेकर गाड़ी स्कूल के समीप पहुंचती है तो वे स्कूल छोड़कर गाड़ी के पीछे भागना शुरू कर देते हैं। जो शिक्षा के साथ पूरी तरह से खिलवाड़ है। अगर, सरकार की मंशा है कि स्कूल पहुंचकर बच्चे शिक्षित हों तो उन्हें शिक्षा के संसाधन मुहैया करवाने चाहिए, जबकि प्राइमरी विद्यालयों में आज संसाधनों की भारी कमी है। विद्यालयों में न बिजली है और न पानी की व्यवस्था, बैठने को उचित व्यवस्था भी बालकों को नहीं मिल पा रही है। शिक्षकों की कमी लंबे समय से चल रही है। सरकार भोजन देकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है।

देवेंद्र शर्मा, शिक्षाविद्

मथुरा में 2076 विद्यालयों में करीब एक लाख 61 हजार छात्र-छात्रओं को मिड डे मील का वितरण किया जा रहा है। इसमें 1949 परिषदीय, 93 सहायता प्राप्त विद्यालय, छह राजकीय इंटर कॉलेज, पांच राजकीय बेसिक विद्यालय, तीन समाज कल्याण द्वारा संचालित, 25 विद्यालय बेसिक शिक्षा विभाग से सहायता प्राप्त हैं। इसमें कक्षा पांच तक के छात्र-छात्र पर 4.23 रुपया और छह से आठ तक के छात्र-छात्र पर 6.18 रुपया खर्चा आता है। नये शिक्षा सत्र में विद्यालय खुले एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन अभी तक मिड डे मील वितरण की व्यवस्था पटरी पर नहीं आ सकी है।

किसी विद्यालय में दस छात्र-छात्रओं के लिए मीड डे मील पहुंच रहा है तो किसी विद्यालय में 20 छात्र-छात्रओं का पेट भर पा रहा है। मिड डे मील में सोमवार को फल, बुध और शुक्र को खीर का वितरण किया जाता है। जिले में मिड डे मील का वितरण अक्षयपात्र संस्था द्वारा किया जा रहा है। मिड डे मील के जिला समन्वयक अतुल पाठक का दावा है कि लगभग सभी छात्र-छात्रओं मिड डे मील मिल रहा है। यदि किसी कारण किन्हीं विद्यालयों में कम पहुंचा है तो वहां पूर्ति कराई जाएगी।

पटरी पर नहीं आया मिड डे मील वितरण

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