शिक्षकों का टोटा, किताबों का इंतजार

जागरण संवाददाता, देवरिया: परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की कमी व किताबों के न आने से अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई में मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। ऐसे में योगी सरकार की मंशा पूरी होते नहीं दिख रही है। तीन माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पठन-पाठन कार्य सुचारू रूप से शुरू नहीं हो पाया। ऐसे में बेसिक शिक्षा विभाग के सामने अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों का संचालन चुनौती बन गया है। जनपद में 90 प्राथमिक विद्यालयों का चयन अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई के लिए हुआ है। पांच विद्यालयों में जहां प्रधानाध्यापकों की कमी है वहीं 130 सहायक अध्यापकों की तैनाती का इंतजार है। यही नहीं, अभी तक इन विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम की निश्शुल्क किताबें भी मुहैया नहीं कराई जा सकी हैं।

ऐसे में प्रदेश सरकार का दावा महज छलावा साबित हो रहा है।1जनपद के सभी 16 ब्लाकों के पांच-पांच विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई के लिए चयनित किया गया है। इनमें 85 विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों की तैनाती कर दी गई है। अभी भी पांच विद्यालयों में तैनाती की जानी है। इसके अलावा प्रत्येक विद्यालयों में पांच-पांच सहायक अध्यापकों यानी कुल 360 सहायक अध्यापक अध्यापन कार्य के लिए चाहिए। लेकिन शिक्षकों की कमी से महज 230 सहायक अध्यापक ही तैनात हुए हैं। 130 शिक्षकों की कमी है। वहीं अंतरजनपदीय तबादला प्रक्रिया के तहत भी जनपद में शिक्षकों का टोटा हो गया है।

जनपद के 179 शिक्षकों का गैर जनपद तबादला हो गया है। जबकि उनकी जगह 79 शिक्षक ही आए हैं। ऐसे में शिक्षकों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में शिक्षकों की कमी बरकरार रहेगी। इस संबंध में बीएसए ने बताया कि किताबें आ रही हैं। इस महीने के अंत तक किताबें मुहैया करा दी जाएगी। अंतरजनपदीय तबादले में आए शिक्षकों में अंग्रेजी विषय के शिक्षकों की भरपाई की जाएगी।

अंग्रेजी माध्यम के संचालित विद्यालयों का बुरा हाल

जनपद में कुल 90 विद्यालय चयनित, 85 में प्रधानाध्यापक तैनात

360 शिक्षकों की जगह मात्र 230 शिक्षकों की ही हो पाई तैनाती

शिक्षकों का टोटा, किताबों का इंतजार

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