विशिष्ट शैली से पढ़ाई में तेज बनाए जाएंगे छठवीं के बच्चे

जागरण संवाददाता, गोरखपुर: परिषदीय स्कूलों के बच्चों की समझ परखने के लिए गत वर्ष कराए गए नेशनल अचीवमेंट सर्वे का परिणाम संतोषजनक नहीं आया। कक्षा पांच के अधिकतर बच्चों को गणित की बेसिक चीजें भी नहीं पता थीं। इस स्थिति को गंभीर माना गया। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने प्रदेश में ऐसे बच्चों को बेहतर तरीके से पढ़ाने के लिए नई शैली विकसित करने पर काम शुरू किया। इस विशिष्ट शैली से कक्षा छह के बच्चों को पढ़ाई में होशियार बनाया जाएगा।

इसलिए कक्षा छह के बच्चों पर होगा फोकस: सरकार द्वारा कराए गए नेशनल अचीवमेंट सर्वे में कक्षा पांच के बच्चों की स्थिति ठीक नहीं मिली थी। गणित की साधारण जानकारियां भी अधिकतर बच्चों को नहीं थीं। यही बच्चे कक्षा छह में आए हैं, इसलिए कक्षा छह में इन बच्चों की समझ विकसित करना जरूरी समझा जा रहा है।

नेशनल अचीवमेंट सर्वे में कम मिला था कक्षा पांच के बच्चों का ज्ञान

उपचारात्मक शिक्षा के लिए विकसित की जा रही विशेष शैली

शिक्षकों को किया जाएगा प्रशिक्षित

बच्चों को आसानी से समझाने के लिए उन्हें सरल विधि से पढ़ाया जाएगा। इसको लेकर कुछ चुनिंदा शिक्षकों की कार्यशाला एससीईआरटी द्वारा आयोजित की गई थी। 1कार्यशाला के बाद माड्यूल तैयार होगा और उसे पढ़ाने के तरीके को लेकर शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षक इसे अपने विद्यालयों में उपयोग कर सकेंगे। इसे उपचारात्मक शिक्षण का नाम दिया गया है। उपचारात्मक शिक्षा पढ़ाई में कमजोर बच्चों को बेहतर बनाने के लिए उपयोग की जाती है। इसके तहत ऐसे बच्चों पर विशेष ध्यान देते हुए उन्हें पढ़ाया जाता है।

विशिष्ट शैली से पढ़ाई में तेज बनाए जाएंगे छठवीं के बच्चे

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