यहाँ तो मोदी हैं सीएम, पीएम अखिलेश

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सात बजे पहुंचे थे 12, नौ तक हो गए 34 बच्चे

 वैसे तो स्कूल का समय बेसिक शिक्षा विभाग ने सुबह सात से 11 बजे तक निर्धारित किया है। ठीक समय पर विद्यालय पहुंचने वाले बच्चों की संख्या काफी कम रहती है। शिक्षकों के बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अभिभावक लापरवाही बरत रहे हैं। स्कूल में बच्चे सात बजे से लेकर नौ बजे तक आ रहे हैं। मॉडल प्राइमरी स्कूल चिलबिला में शुक्रवार को सुबह सात बजे तक कुल 12 बच्चे आए थे, नौ बजे तक इनकी संख्या 34 हो गई।

  प्रतापगढ़: चिलबिला का मॉडल प्राइमरी स्कूल। दिन शुक्रवार, सुबह के सात बजे। स्कूल परिसर में प्रार्थना करते गिनती के बच्चे। कक्षा एक से लेकर पांच तक के बच्चों की एक ही कक्ष में शुरू हुई शिक्षा। कुछ स्कूल ड्रेस में, कई घर से सीधे परंपरागत वस्त्र में पहुंचे वहां। बैग और झोला सामने, किसी के पास गिनती की किताबें, कई बिना किताब-कापी के, कुछेक खाली बैग के सहारे। पूछने पर भोला सा जवाब, नहीं मिली कापी-किताब। तपाक से स्कूल के ¨प्रसिपल ‘साब’ का जवाब, अप्रैल माह में ही आ जानी थी बच्चों की पुस्तकें, सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने मॉडल स्कूल बना दिया, अभी तक नहीं पहुंचा कापी-किताबों का बंडल, सिलेबस भी नहीं बताया गया, हम चला रहे परंपरागत शिक्षा से काम। इस सच का सामना जागरण टीम को मॉडल स्कूल के बच्चों के बीच पहुंचकर हुआ। अपने बीच अनजाने चेहरों को देख नौनिहाल थे भौंचक। ¨प्रसिपल ने बढ़ाया उत्साह, उनके उदास चेहरों पर भी छायी खुशी।

जागरण टीम ने बच्चों से किए कुछ सवाल, ज्यादातर निरुत्तर। सीएम और पीएम के नाम पर बच्चे सकपकाए। कइयों ने कोशिश की, आधा-अधूरा नाम बता पाए। कुछ ने साहस दिखाया, मोदी को सीेएम और अखिलेश यादव को पीएम बताया। ये है उस मॉडल स्कूल की तस्वीर, जहां से लिखी जानी है हिन्दुस्तान की तकदीर। 1शहर के मॉडल प्राइमरी स्कूल चिलबिला में शुक्रवार को पहुंची जागरण टीम ने बच्चों का किताबी एवं सामान्य ज्ञान परखा तो हकीकत सामने आ गई। इस स्कूल के कक्षा चार के छात्र समीर से जब प्रदेश के मुख्यमंत्री का नाम पूछा गया तो उसने नरेंद्र मोदी बताया। जब उससे प्रधानमंत्री का नाम पूछा गया तो उसने कहा अखिलेश यादव। जबकि समीर के छोटे भाई कक्षा तीन के छात्र मो.साबिर ने पूछे गए सभी सवालों का जवाब सही दिया। उसने 12 तक का पहाड़ा भी सुनाया तथा फर्राटे से पांच जानवरों का नाम अंग्रेजी में बता गया। कक्षा तीन के मनोज को 15 तक का पहाड़ा याद था, जिले का नाम चिलबिला प्रतापगढ़ बताया।

कक्षा तीन का मनोज भी प्रधानमंत्री व यूपी के मुख्यमंत्री का नाम न बता सका। इस मामले में कक्षा चार की सोनम व काजल गुप्ता बेहतर रहीं, दोनों ने मुख्यमंत्री का नाम आदित्यनाथ योगी बताया। हालांकि इन्हें भी प्रधानमंत्री, यूपी के राज्यपाल का नाम नहीं मालूम था। स्कूल के प्रधानाध्यापक का नाम पूछा गया, यह भी नहीं बता पाई। कक्षा तीन की खुशबू को 12 तक का पहाड़ा याद था, वह पांच जानवरों का नाम अंग्रेजी में नही बता सकी। कक्षा दो की अल्फिया ने स्कूल का नाम सही बताया, तीन का पहाड़ा सुनाया। कक्षा दो के शिवा व जोया ने कविता सुनाई। इस विद्यालय में रसोई घर नहीं बना है। बरामदे में मिड-डे-मील बनाया जाता है। विद्यालय में पंजीकृत बच्चों की संख्या 99 है। 30 बच्चों पर एक शिक्षक के हिसाब से यहां दो और शिक्षक होने चाहिए। यहां के प्रधानाध्यापक दिनेश कुमार सिंह ने बताया कि शिक्षामित्र संतोष अवकाश पर हैं और अभी तक दो सहायक अध्यापकों की नियुक्ति नहीं है।मॉडल प्राइमरी स्कूल चिलबिला में कविता सुनाती छात्र।नगर क्षेत्र के कुल सात विद्यालयों को मॉडल प्राइमरी स्कूल के रूप में चिह्नित किया गया था।

प्राथमिक विद्यालय पुलिस लाइन, चिलबिला, जिरियामऊ, शंकरदयाल रोड, महुली, नया मालगोदाम रोड व दहिलामऊ। इनमें से मॉडल प्राइमरी स्कूल पुलिस लाइन, चिलबिला, जिरियामऊ, शंकरदयाल रोड का संचालन शुरू हो गया है, जबकि माडल प्राइमरी स्कूल महुली, नया मालगोदाम रोड व दहिलामऊ में शिक्षक न मिलने से अब इनके स्थान पर अंचल के तीन प्राइमरी स्कूलों को चिह्नित किया गया है। इनमें प्राइमरी स्कूल नरिया, अधारगंज तथा मानधाता शामिल हैं। विभाग ने मॉडल स्कूल तो चिह्नित कर खोल दिए, लेकिन उनमें न तो पर्याप्त शिक्षक दिए, न समय से पाठ्य पुस्तकें और न ही सभी को यूनीफार्म। सिर्फ एक प्रधानाध्यापक की तैनाती कर स्कूल का संचालन शुरू कर दिया और स्कूल के बाहर मॉडल प्राइमरी स्कूल पेंट करा दिया।

पाठ्य पुस्तकों के अभाव में शिक्षक को पाठ्यक्रम की भी जानकारी नहीं हो सकी है कि आखिर बच्चों को पढ़ाना क्या है। नए शैक्षिक सत्र के दो माह बीतने को हैं जाहिर सी बात है कि जब अध्यापक को ही पाठ्यक्रम के विषय की जानकारी नहीं है तो वह बच्चों को कैसे शिक्षा देंगे। यदि यही हाल रहा तो प्राइमरी स्कूल कभी मॉडल नहीं बन पाएंगे और पुराने पर र्ढे पर चलते हुए सिर्फ खाना पूरी करेंगे।

नगर क्षेत्र के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षकों का अभाव है। जो मॉडल स्कूल बनाए गए थे, उनमें नगर क्षेत्र के स्कूलों से शिक्षक रखे जाने थे। शिक्षकों के अभाव में नगर के तीन माडल स्कूलों के स्थान पर अंचल के तीन माडल स्कूलों का चयन किया गया है।


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